परख सर्वे: निजी स्कूलों में भी होगी तैयारी, शिक्षकों को मिलेगा प्रशिक्षण

परख सर्वे को लेकर उत्तर प्रदेश में स्कूल स्तर पर तैयारियां लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही हैं। राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले इस आकलन का उद्देश्य केवल बच्चों की परीक्षा लेना नहीं, बल्कि यह समझना है कि अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थी भाषा, गणित, विज्ञान और अन्य विषयों में अपनी सीखी हुई बातों को वास्तविक परिस्थितियों में कितना लागू कर पा रहे हैं। इसी वजह से आने वाले आकलन में सरकारी विद्यालयों के साथ निजी विद्यालयों की भागीदारी और उनकी तैयारी पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

PARAKH यानी Performance Assessment, Review and Analysis of Knowledge for Holistic Development, शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत NCERT का राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र है। इसका काम स्कूल शिक्षा में मूल्यांकन के मानकों को मजबूत करना और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर की व्यापक तस्वीर सामने लाना है।

निजी स्कूलों की तैयारी पर भी रहेगा जोर

पहले बड़े शैक्षिक सर्वे को लेकर सरकारी विद्यालयों में तैयारियों पर ज्यादा चर्चा होती थी, लेकिन अब निजी मान्यता प्राप्त विद्यालय भी इस तरह के राष्ट्रीय आकलन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। PARAKH Rashtriya Sarvekshan 2024 में देशभर के सरकारी, सहायता प्राप्त, निजी मान्यता प्राप्त और केंद्रीय सरकारी विद्यालयों को शामिल किया गया था। उत्तर प्रदेश में भी अलग-अलग प्रकार के विद्यालयों के विद्यार्थियों ने इस आकलन में भाग लिया था।

इसका सीधा मतलब यह है कि निजी विद्यालयों के शिक्षकों को भी केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने के बजाय बच्चों की वास्तविक दक्षताओं पर ध्यान देना होगा। विद्यार्थियों को ऐसे प्रश्नों और गतिविधियों के लिए तैयार करना जरूरी होगा, जिनमें रटकर उत्तर देने के बजाय समझ, तर्क और समस्या समाधान की क्षमता का इस्तेमाल करना पड़े।

पिछले परख सर्वे के परिणामों से मिली दिशा

PARAKH Rashtriya Sarvekshan 2024 का आयोजन 4 दिसंबर 2024 को किया गया था। राष्ट्रीय स्तर पर कक्षा 3, 6 और 9 के विद्यार्थियों की दक्षताओं का आकलन किया गया। NCERT की राष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार इस सर्वे में 21 लाख से अधिक विद्यार्थियों और 74 हजार से अधिक विद्यालयों को शामिल किया गया था।

कक्षा 3 के स्तर पर भाषा और गणित में विद्यार्थियों की बुनियादी दक्षताओं को विशेष महत्व दिया गया। रिपोर्ट से यह भी सामने आया कि प्रारंभिक स्तर पर सरकारी और निजी विद्यालयों के प्रदर्शन की तुलना करके सीखने के अंतर को समझने की कोशिश की गई। उत्तर प्रदेश उन राज्यों में शामिल रहा जहां कुछ प्रमुख क्षेत्रों में राज्य सरकारी विद्यालयों का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय रहा।

इन परिणामों का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि सर्वे का उद्देश्य किसी एक बच्चे या स्कूल को पास-फेल करना नहीं है। इससे शिक्षा व्यवस्था में मौजूद सीखने की कमियों को पहचानकर आगे की रणनीति तैयार करने में मदद मिलती है।

शिक्षकों की ट्रेनिंग पर भी रहेगा फोकस

परख सर्वे के बाद केवल आंकड़े जारी करके प्रक्रिया खत्म नहीं होती। NCERT की रिपोर्ट में सर्वे के परिणामों को समझने और उनके आधार पर आगे की कार्ययोजना बनाने के लिए राष्ट्रीय, क्षेत्रीय, राज्य और जिला स्तर पर कार्यशालाओं की योजना का उल्लेख किया गया है। इनमें SCERT, शिक्षा विभाग के अधिकारी, स्कूल प्रमुख और शिक्षक मिलकर सीखने की कमियों को समझ सकते हैं।

इसका असर स्कूलों की शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। शिक्षकों को यह समझाने की जरूरत होगी कि competency-based assessment में केवल किताब से प्रश्न पूछना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थी किसी अवधारणा को समझता है या नहीं, उसे दैनिक जीवन की समस्या में लागू कर सकता है या नहीं और अलग परिस्थिति में अपने ज्ञान का उपयोग कर सकता है या नहीं, इन पहलुओं पर भी ध्यान देना होता है।

2026 में फाउंडेशनल लर्निंग पर भी विशेष ध्यान

वर्तमान समय में PARAKH की गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Foundational Learning Study यानी FLS 2026 भी है। इसका मुख्य उद्देश्य शुरुआती कक्षाओं में बच्चों की बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक क्षमता को समझना है। PARAKH की जानकारी के अनुसार इस अध्ययन में बड़े स्तर पर स्कूलों और कक्षा 3 के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है तथा आकलन को अधिक तकनीक आधारित बनाने के लिए टैबलेट का उपयोग किया जा रहा है।

FLS और PARAKH Rashtriya Sarvekshan को एक जैसा समझना सही नहीं होगा। PARAKH Rashtriya Sarvekshan में अलग-अलग शैक्षिक चरणों पर व्यापक दक्षताओं का आकलन किया जाता है, जबकि Foundational Learning Study का फोकस मुख्य रूप से शुरुआती स्तर की पढ़ने, समझने और गणितीय क्षमताओं पर रहता है।

स्कूलों के लिए इसका क्या मतलब है?

निजी और सरकारी दोनों प्रकार के विद्यालयों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों को केवल परीक्षा आधारित तैयारी कराने के बजाय उनकी वास्तविक सीखने की क्षमता मजबूत की जाए। भाषा में पढ़ने और समझने, गणित में संख्या ज्ञान और समस्या समाधान तथा आसपास की परिस्थितियों को समझने जैसी क्षमताएं प्रारंभिक स्तर पर मजबूत होंगी तो आगे की कक्षाओं में भी इसका लाभ मिलेगा।

विद्यालयों को पिछले आकलन से सामने आए कमजोर क्षेत्रों की पहचान करके कक्षा स्तर पर अतिरिक्त अभ्यास कराना उपयोगी रहेगा। शिक्षकों के लिए भी यह जरूरी है कि वे बच्चों की गलतियों को केवल अंक कम होने के रूप में न देखें, बल्कि यह समझें कि गलती किस अवधारणा में हो रही है।

अभिभावकों को भी समझनी चाहिए परख सर्वे की भूमिका

परख सर्वे को सामान्य वार्षिक परीक्षा की तरह देखना सही नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को समझना और भविष्य की नीतियों तथा सुधार योजनाओं के लिए प्रमाण आधारित जानकारी उपलब्ध कराना है। केंद्र सरकार ने भी PARAKH को शिक्षा व्यवस्था के स्वास्थ्य और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर की निगरानी से जुड़े राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र के रूप में स्थापित किया है।

इसलिए अभिभावकों को केवल बच्चों के संभावित अंक पर ध्यान देने के बजाय यह देखना चाहिए कि बच्चा पढ़ी हुई बात को समझ रहा है या नहीं, गणितीय अवधारणाओं को दैनिक जीवन में इस्तेमाल कर पा रहा है या नहीं और किसी समस्या का समाधान अपने तरीके से सोच सकता है या नहीं।

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