शिक्षकों के टैबलेट का डिजिटल ऑडिट, गलत इस्तेमाल पर होगी कार्रवाई

शिक्षकों के टैबलेट का डिजिटल ऑडिट अब सरकारी स्कूलों में तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल की वास्तविक स्थिति जानने का माध्यम बनने जा रहा है। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों को उपलब्ध कराए गए टैबलेट का उद्देश्य केवल ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना नहीं है, बल्कि डिजिटल लर्निंग, दीक्षा और निपुण भारत जैसे शैक्षणिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल, स्मार्ट क्लास संचालन तथा विभागीय कार्यों को आसान बनाना भी है। अब विभाग यह देखना चाहता है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल वास्तव में निर्धारित शैक्षणिक और विभागीय कार्यों के लिए ही हो रहा है या नहीं।

टैबलेट के इस्तेमाल की होगी डिजिटल जांच

विभागीय स्तर पर टैबलेट की गतिविधियों की जांच करने की तैयारी है। डिजिटल ऑडिट के दौरान यह देखा जा सकता है कि डिवाइस का इस्तेमाल किस प्रकार के कार्यों में किया जा रहा है और शैक्षणिक ऐप्स का उपयोग कितना हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार टैबलेट के यूसेज डेटा, ऐप उपयोग और स्क्रीन टाइम जैसी गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकती है।

इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों पर केवल निगरानी रखना नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करना है। जब किसी विद्यालय को डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराया जाता है तो उसका इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई और विभागीय कार्यों में होना अपेक्षित है।

हरदोई में 2777 विद्यालयों को मिले थे टैबलेट

हरदोई जिले से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल 3446 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें 2777 विद्यालयों को टैबलेट उपलब्ध कराए गए थे। वर्ष 2023-24 में इन उपकरणों के माध्यम से शिक्षक उपस्थिति, छात्र उपस्थिति और मध्यान्ह भोजन सहित कई रजिस्टरों को डिजिटल करने की योजना बनाई गई थी। पहले भी रिपोर्टों में इन टैबलेट के इस्तेमाल और ऑनलाइन प्रक्रियाओं की धीमी प्रगति का मुद्दा सामने आया था।

यानी यह टैबलेट केवल एक सामान्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस नहीं हैं। इनके जरिए विद्यालयों में कई प्रशासनिक और शैक्षणिक गतिविधियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की कोशिश की गई है।

दीक्षा, निपुण भारत और स्मार्ट क्लास में उपयोग

शिक्षकों को दिए गए टैबलेट का उपयोग डिजिटल शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए किया जाना है। शिक्षक इन उपकरणों की मदद से डिजिटल कंटेंट का इस्तेमाल कर सकते हैं। दीक्षा और निपुण भारत जैसे शैक्षणिक प्लेटफॉर्म के अलावा ऑनलाइन उपस्थिति और विद्यालय से जुड़े अन्य डिजिटल कार्य भी किए जा सकते हैं।

डिजिटल माध्यम से पढ़ाई का एक फायदा यह है कि बच्चों को विषय को समझाने के लिए वीडियो, चित्र और अन्य इंटरैक्टिव सामग्री का उपयोग किया जा सकता है। खासकर प्राथमिक कक्षाओं में ऐसी सामग्री बच्चों की रुचि बढ़ाने में उपयोगी हो सकती है।

निजी मनोरंजन या सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर नजर

डिजिटल ऑडिट की सबसे महत्वपूर्ण वजह टैबलेट के संभावित गैर-शैक्षणिक इस्तेमाल को बताया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार यदि सरकारी टैबलेट का उपयोग स्कूल समय में सोशल मीडिया, यूट्यूब, निजी मनोरंजन या अन्य गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के लिए किया जाता है तो इसे विभागीय स्तर पर गंभीरता से देखा जा सकता है।

इसके अलावा डिवाइस में अनधिकृत एप डाउनलोड करना या विभागीय ऐप को हटाना जैसी गतिविधियां भी जांच के दायरे में आ सकती हैं। हालांकि किसी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई का आधार संबंधित विभागीय जांच और लागू नियम ही होंगे।

गड़बड़ी मिलने पर क्या हो सकता है?

डिजिटल ऑडिट में यदि टैबलेट के इस्तेमाल में निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित शिक्षक से स्पष्टीकरण लिया जा सकता है और विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। उपलब्ध रिपोर्टों में प्रतिकूल प्रविष्टि जैसी कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है।

इसलिए शिक्षकों के लिए जरूरी है कि सरकारी टैबलेट में केवल अधिकृत और शैक्षणिक जरूरत से जुड़े एप तथा सेवाओं का इस्तेमाल किया जाए। किसी भी तकनीकी बदलाव या अनधिकृत एप को लेकर विभागीय निर्देशों का पालन करना बेहतर होगा।

डिजिटल ऑडिट से बढ़ सकती है जवाबदेही

दरअसल, सरकारी स्कूलों में डिजिटल संसाधनों पर खर्च का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब उनका इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई और विद्यालयी व्यवस्था को बेहतर बनाने में हो। डिजिटल ऑडिट से विभाग को यह समझने में मदद मिल सकती है कि उपलब्ध कराए गए टैबलेट का वास्तविक उपयोग किस स्तर पर हो रहा है।

साथ ही यह व्यवस्था शिक्षकों के लिए भी एक अवसर है कि वे टैबलेट का इस्तेमाल केवल उपस्थिति या रजिस्टर संबंधी कार्य तक सीमित न रखकर डिजिटल शिक्षण को मजबूत करने में करें। तकनीक का सही इस्तेमाल बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बना सकता है।

शिक्षकों के लिए क्या जरूरी है?

शिक्षकों को विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही टैबलेट का इस्तेमाल करना चाहिए। दीक्षा, निपुण भारत, ऑनलाइन उपस्थिति, स्मार्ट क्लास और अन्य अधिकृत शैक्षणिक गतिविधियों को प्राथमिकता देना जरूरी है। किसी भी निजी या गैर-शैक्षणिक उपयोग से बचना चाहिए, खासकर विद्यालयी कार्य के समय।

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